कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक हलचल के बीच पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा का एक बयान नए विवाद का कारण बन गया है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद असंतोष खुलकर सामने आ गया है और अब मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए करीब 20 सांसदों ने हाल ही में एक बैठक कर महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने पर सहमति जताई है। बागी सांसदों का आरोप है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और इससे उनकी राजनीतिक तथा व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचा है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत महुआ मोइत्रा के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पार्टी छोड़ने वाले कुछ नेताओं को भारी आर्थिक प्रलोभन दिया गया था। उनके इस बयान के बाद संबंधित सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
बागी नेताओं का कहना है कि बिना किसी ठोस सबूत के इस तरह के आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करता है। इसी वजह से उन्होंने कानूनी विकल्प अपनाने का फैसला किया है।
सियासत से अदालत तक पहुंच सकता है मामला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। यदि मानहानि का मुकदमा दायर किया जाता है, तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है और इससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेद भी एक बार फिर चर्चा में आ सकते हैं।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि महुआ मोइत्रा या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।
