रायपुर
विशेष कवरेज | छत्तीसगढ़ संवाददाता खबर है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित ऐतिहासिक महादेव घाट पर बनारस की तर्ज पर भव्य ‘खारून गंगा आरती’ का आयोजन फिर से होने जा रहा है जो कि पिछले कई सालों से आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस संबंध में सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर किसी व्यक्ति द्वारा एक पोस्ट साझा किया गया है और लिखा गया है कि 12 साल बेमिसाल खारुन गंगा की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है और इसके आयोजक भाजपा नेता राजेश मूणत हैं। इस दिव्य और धार्मिक परंपरा की शुरुआत करने का मुख्य श्रेय क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर को जाता है। उन्होंने सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से इस भव्य महाआरती की नींव रखी थी। इसके लिए वीरेन्द्र सिंह तोमर को वर्ल्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। गौरतलब है कि इस भव्य महाआरती में वीरेन्द्र सिंह तोमर ने बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर को भी बुलाया था, जहां पांच लाख से अधिक लोग इसके साक्षी रहे थे।

बनारस की तर्ज पर सनातनी आयोजन
वीरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में शुरू हुई यह आरती न केवल छत्तीसगढ़ की गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक बन चुकी थी, बल्कि यह युवाओं को आध्यात्म से जोड़ने का एक बड़ा माध्यम भी बना। इस आयोजन के तहत हर विशेष अवसर और पूर्णिमा की संध्या पर माँ खारून और हटकेश्वर महादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही थी। इस दौरान हजारों दीपों के दान और मंत्रोच्चार से पूरा महादेव घाट परिसर गुंजायमान हो उठता है।
जन-जन तक पहुँच रही थी आस्था
सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर पर इस धार्मिक पहल की जमकर सराहना होती रही है। आम जनता और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस महाआरती के जरिए छत्तीसगढ़ में हिंदुत्व और सनातनी परंपराओं को एक नया बल मिला है।
छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जिसे माता कौशल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्री राम का ननिहाल होने का गौरव प्राप्त है, इन दिनों एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण की गवाह बन रही है। राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल महादेव घाट पर बहने वाली जीवनदायिनी खारून नदी के तट पर हर शाम एक अलौकिक दृश्य देखने को मिलता है। बनारस और हरिद्वार के गंगा घाटों की तर्ज पर यहाँ आयोजित होने वाली ‘खारून गंगा आरती’ आज छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी है।
इस भव्य, दिव्य और निरंतर चलने वाली धार्मिक परंपरा की शुरुआत करने और इसे जन-आंदोलन का रूप देने का मुख्य श्रेय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर को जाता है। उनकी दूरगामी सोच और सनातनी संकल्प के कारण ही आज खारून नदी का तट हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। लेकिन कुछ असामाजित तत्वों की शरारत और द्वेशपूर्ण भवना की वजह से उन्हें कई सारे झूठे केसों में फंसाकर जेल भेज दिया गया। हालांकि वे जेल से तो बाहर आ चुके हैं लेकिन खारुन गंगा महाआरती उनके जेल जाने के बाद से बंद हो गई थी।
खबर है कि कुछ लोग इसे फिर से शुरु कर नाम पाने की कोशिश कर रहे हैं। खारुन गंगा से जुड़ी ऐसी पहल का करनी सेना स्वागत करती है। लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता यह बात जानती है कि वीरेन्द्र सिंह तोमर ही वह व्यक्ति है जिसने खारुन को देश-दुनिया में पहचान दिलाया।
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बनारस और हरिद्वार की तर्ज पर महाआरती की परिकल्पना
छत्तीसगढ़ में नदियों को माता के रूप में पूजने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन खारून नदी के तट को एक राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक पर्यटन और आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस कमी को दूर करने का बीड़ा वीरेंद्र सिंह तोमर ने उठाया।
उन्होंने उत्तर भारत की पावन गंगा आरती की तर्ज पर रायपुर में भी ‘खारून गंगा आरती’ की रूपरेखा तैयार की। इस आरती का उद्देश्य केवल एक धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं था, बल्कि इसके पीछे छत्तीसगढ़ की जनता को अपनी नदियों के प्रति जागरूक करना, जल संरक्षण का संदेश देना और सनातन संस्कृति के गौरव को पुनर्स्थापित करना था। पीतल के बड़े-बड़े दीपकों, शंखनाद, डमरू की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब माँ खारून की आरती की जाती है, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। लेकिन कुछ असामाजित तत्वों की बदमाशी की वजह से इसे बंद करना पड़ गया।
वीरेंद्र सिंह तोमर और करणी सेना का अद्वितीय योगदान
करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ के जुझारू प्रदेश अध्यक्ष के रूप में वीरेंद्र सिंह तोमर की पहचान हमेशा से समाज सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने वाले नेता के रूप में रही है। इस महाआरती के आयोजन में उन्होंने और उनकी पूरी टीम ने दिन-रात एक कर दिया।
शुरुआती दिनों में जब इस तरह के बड़े आयोजन को लगातार बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी, तब श्री तोमर ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों और करणी सेना के मजबूत संगठन के बल पर इसे बिखरने नहीं दिया। उन्होंने न केवल इस आयोजन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करवाया, बल्कि समाज के हर वर्ग—चाहे वे युवा हों, महिलाएं हों या बुजुर्ग—सभी को इस आरती से जोड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि वीरेंद्र सिंह तोमर की इस पहल ने बिखरे हुए सनातनी समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।
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हटकेश्वर महादेव और माँ खारून का पौराणिक महत्व
जिस महादेव घाट पर इस आरती का आयोजन होता है, उसका इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यहाँ स्थापित लक्ष्मणेश्वर (हटकेश्वर) महादेव मंदिर सदियों से लोगों की अगाध श्रद्धा का केंद्र रहा है। ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में स्वयं भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी के चरण इस भूमि पर पड़े थे।
इस ऐतिहासिक घाट पर खारून नदी की लहरों के बीच जब महाआरती की शुरुआत होती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो आधुनिकता के शोर के बीच सदियों पुरानी संस्कृति पुनर्जीवित हो उठी हो। कार्तिक पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, सावन मास और हर महीने की पूर्णिमा पर यहाँ का नजारा देखते ही बनता है, जब लाखों दीपों के दान से पूरी नदी साक्षात दीप-महोत्सव में बदल जाती है।
युवाओं को अध्यात्म और जड़ों से जोड़ने की मुहिम
आज के आधुनिक युग में जहाँ युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जा रही है, वहीं ‘खारून गंगा आरती’ युवाओं के लिए आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरी। वीरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में करणी सेना ने इस आयोजन को युवाओं के अनुकूल और प्रेरणादायक बनाया है।
आरती में बड़ी संख्या में युवा न केवल शामिल होते हैं, बल्कि इसके प्रबंधन, साफ-सफाई और व्यवस्था संचालन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सोशल मीडिया पर इस आरती के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होती हैं, जिसने छत्तीसगढ़ के बाहर भी राज्य की एक सकारात्मक और धार्मिक छवि पेश की है।
पर्यावरण संरक्षण और ‘स्वच्छ खारून’ का संदेश
वीरेंद्र सिंह तोमर की इस पहल का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण और जल संरक्षण भी है। खारून नदी रायपुर की जीवनरेखा है। आरती की शुरुआत के साथ ही घाटों की नियमित साफ-सफाई का अभियान भी शुरू किया गया।
आरती के मंच से लगातार श्रद्धालुओं को नदी में कचरा या प्लास्टिक न फेंकने का संकल्प दिलाया जाता है। करणी सेना के स्वयंसेवक हर बड़े आयोजन के बाद घाट की स्वच्छता सुनिश्चित करते हैं। इस तरह यह धार्मिक आयोजन समाज को स्वच्छता और प्रकृति की रक्षा के प्रति भी जागरूक कर रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में सराहना
वीरेंद्र सिंह तोमर द्वारा शुरू की गई इस पावन परंपरा की गूंज अब शासन-प्रशासन और राजनीतिक गलियारों तक भी पहुँच चुकी है। समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, साधु-संत और समाज के प्रतिष्ठित प्रबुद्ध जन इस आरती में शामिल होकर श्री तोमर की सराहना कर चुके हैं।
आम जनता के बीच यह चर्चा आम है कि जो काम सरकारों को बहुत पहले कर देना चाहिए था, उसे वीरेंद्र सिंह तोमर ने एक सामाजिक संगठन के मुखिया के तौर पर अपने दृढ़ संकल्प से कर दिखाया। आज स्थिति यह है कि सरकारें और स्थानीय प्रशासन भी इस आयोजन को आगे बढ़ाने और महादेव घाट के सौंदर्यीकरण के लिए आगे आ रहे हैं, जिसे तोमर की एक बड़ी वैचारिक जीत माना जा रहा है।
भविष्य का संकल्प: राष्ट्रीय पटल पर चमकेगा छत्तीसगढ़
वीरेंद्र सिंह तोमर और करणी सेना का संकल्प केवल रायपुर तक सीमित रहने का नहीं है। उनका उद्देश्य इस खारून गंगा आरती को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग जब छत्तीसगढ़ आएं, तो वे इस पावन आरती का हिस्सा जरूर बनें।
आने वाले समय में इस आयोजन को और अधिक भव्य रूप देने, आधुनिक सुविधाओं से लैस घाटों का निर्माण कराने और सनातन संस्कृति के इस विजय रथ को अनवरत आगे बढ़ाने की योजनाएं तैयार की जा रही हैं। कुछ लोगों के द्वारा बंद पड़े खारुन गंगा महाआरती को फिर से शुरु करने के सवाल पर क्षत्रिय करनी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि खारुन गंगा छत्तीसगढ़ के लोगों के दिल में बसा है, इसे अब कौन शुरु कर रहा है, कैसे कर रहा है, यह विषय राजनीति का नहीं है, लेकिन शुरुआत हो रही है तो यह अच्छी बात है।
“माँ खारून की कृपा और हमारे सनातन समाज के सहयोग से यह आरती कभी नहीं रुकनी चाहिए। हमारा उद्देश्य केवल आरती करना नहीं, बल्कि देश एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश के हर सनातनी के दिल में अपनी संस्कृति और अपनी नदियों के प्रति अगाध प्रेम और जिम्मेदारी का भाव जगाते रहना है। खारुन गंगा आरती को भले ही मैंने शुरुआत की थी, लेकिन कुछ कारणों से यह बंद पड़ गया था और जनता की मांग है तो इसे लोग फिर से शुरु कर रहे हैं, इसका स्वागत होना चाहिए” > — वीरेंद्र सिंह तोमर (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, करणी सेना एवं प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़)
रायपुर के महादेव घाट पर होने वाली ‘खारून गंगा आरती’ आज छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है। वीरेंद्र सिंह तोमर की इस ऐतिहासिक और भगीरथ पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व में दृढ़ इच्छाशक्ति और संस्कृति के प्रति सच्ची निष्ठा हो, तो समाज में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह महाआरती आने वाली पीढ़ियों को हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती रहेगी।
