रायपुर/कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत में भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार की जघन्य हत्या के बाद प्रशासनिक गलियारों और पुलिस महकमे में जबरदस्त खलबली मची हुई है। क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर द्वारा दिए गए प्रदेशव्यापी आंदोलन और ‘चक्का जाम’ के अल्टीमेटम ने राज्य की ब्यूरोक्रेसी की नींद उड़ा दी है। खुफिया एजेंसियों (IB और स्पेशल ब्रांच) को हाई अलर्ट पर रखते हुए गृह विभाग ने पूरे मामले पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर, कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती
करणी सेना के तीखे तेवरों और राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत की अगुवाई में कोरिया में बड़े आंदोलन के ऐलान के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) हरकत में आ गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखें। विशेष रूप से कोरिया और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या अचानक होने वाले ‘चक्का जाम’ से निपटा जा सके।
सरकारी तंत्र की मिलीभगत का अंदेशा; सीधे CBI जांच की मांग
प्रशासनिक अमले के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय करणी सेना द्वारा लगाया गया गंभीर आरोप है। वीरेंद्र सिंह तोमर ने खुलेआम अंदेशा जताया है कि इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड के पीछे सरकारी तंत्र, रसूखदार राजनेताओं और कुछ आला अफसरों का हाथ हो सकता है। यही कारण है कि करणी सेना ने स्थानीय पुलिसिया जांच पर अविश्वास जताते हुए सीधे *CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जांच* की मांग उठा दी है। इस मांग ने गृह विभाग और स्थानीय ब्यूरोक्रेसी पर चौतरफा दबाव बना दिया है।
प्रशासनिक इनसाइड: “एक सत्ताधारी दल के नेता की इस तरह निर्मम हत्या और उसके बाद एक बड़े सामाजिक संगठन द्वारा सीधे ब्यूरोक्रेसी और मंत्रियों पर मिलीभगत के आरोप लगाने से पुलिस और खुफिया तंत्र बैकफुट पर है। वर्तमान में पहली प्राथमिकता किसी भी तरह से चक्का जाम या उग्र आंदोलन को रोकना है।”
सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो में बोलते हुए वीरेंद्र सिंह तोमर
https://www.facebook.com/vstomarofficial/videos/2251411672361940
गृह विभाग पर बढ़ा भारी दबाव; क्या झुकेगा प्रशासन?
करणी सेना के अल्टीमेटम— “न्याय दिलाबो, नई तो छत्तीसगढ़ बंद कराबो” ने शासन-प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यदि करणी सेना के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर प्रदेशव्यापी आर्थिक नाकेबंदी या हाईवे जाम करते हैं, तो राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस बात की सुगबुगाहट तेज है कि गृह विभाग इस दबाव के बीच क्या कदम उठाएगा। क्या प्रशासन करणी सेना की मांगों के आगे झुकते हुए आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश की तर्ज पर त्वरित ‘बुलडोजर’ जैसी कठोर कार्रवाई का रास्ता अपनाएगा, या फिर कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही मामले को शांत करने की कोशिश की जाएगी? फिलहाल, इस चेतावनी के बाद पूरे छत्तीसगढ़ की पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी अलर्ट पर है।
