नई दिल्ली/वॉशिंगटन: पिछले तीन महीनों से अधिक समय से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य और राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक बड़े शांति समझौते की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस बात के संकेत दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के सोशल मीडिया पर आए एक हालिया कदम से मिले हैं।
ईरानी विदेश मंत्री का दावा: “समझौते के बेहद करीब
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए जानकारी दी कि दोनों देश संघर्ष को खत्म करने के लिए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)’ के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
अराघची ने लिखा:
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रीपोस्ट से बढ़ी हलचल
इस खबर को तब और अधिक हवा मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी विदेश मंत्री के इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर रीपोस्ट (साझा) कर दिया। ट्रंप के इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, जिससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के बीच बैक-चैनल वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
क्या हैं समझौते की संभावित शर्तें?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट और विभिन्न सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित समझौते (MoU) के तहत निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर सहमति बन सकती है:
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से पूरी तरह खोल देगा।
- फ्रीज फंड्स की रिहाई: इसके बदले में अमेरिका, ईरान की फ्रीज (जब्त) की गई अरबों डॉलर की संपत्ति को रिलीज करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
- प्रतिबंधों में ढील: ईरानी तेल के निर्यात पर लगे कुछ कड़े प्रतिबंधों में अमेरिका ढील दे सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और पाक पीएम ने दी प्रतिक्रिया
इस बीच, अफवाहों और कयासों पर विराम लगाने के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्थिति साफ की। वेंस ने कहा कि ईरान को सिर्फ बैठक में शामिल होने या दस्तखत करने के लिए कोई नकद पैसा नहीं दिया जा रहा है। यह डील इस तरह बनाई गई है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंताओं (जैसे ईरान का परमाणु कार्यक्रम) को प्राथमिकता मिले। अगर ईरान अपनी जिम्मेदारियां निभाता है, तो पूरे क्षेत्र को आर्थिक फायदा होगा।
