नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार में अपने 12 साल पूरे करने के साथ ही भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का एक सबसे बड़ा राजनीतिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वह लगातार 4,399 दिनों तक देश के प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले पहले नेता बन गए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के मौके पर राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक बेहद महत्वपूर्ण और भव्य बैठक आयोजित की गई।
नेहरू के ‘लगातार’ कार्यकाल का रिकॉर्ड टूटा
इस ऐतिहासिक पड़ाव को पार करते हुए पीएम मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
- रिकॉर्ड की तुलना: 1952 के बाद (जब देश में पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव हुए) जवाहरलाल नेहरू लगातार 4,398 दिनों तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे। अब पीएम मोदी 4,399 दिनों के साथ लगातार सेवा देने वाले देश के सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं।
- 9,000 दिनों से अधिक का अनुभव: मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कुल कार्यकाल को मिला दिया जाए, तो नरेंद्र मोदी 9,000 से अधिक दिनों तक सरकार के निर्वाचित प्रमुख (Head of Government) रहने का गौरव भी हासिल कर चुके हैं, जो अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है।
भारत मंडपम में NDA का बड़ा प्रस्ताव
इस ऐतिहासिक मौके को मनाने और गठबंधन की एकजुटता दिखाने के लिए भारत मंडपम में NDA की बैठक बुलाई गई।
- चंद्रबाबू नायडू ने रखा प्रस्ताव: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बैठक में एक विशेष राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें पीएम मोदी के 12 वर्षों के बेदाग और मजबूत नेतृत्व की सराहना की गई। नागालैंड के सीएम ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
- दिग्गजों का जमावड़ा: बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष और गठबंधन के 35 घटक दलों के प्रमुख नेता शामिल हुए।
- मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति: एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री—जैसे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी समेत 22 राज्यों के शीर्ष प्रतिनिधि इस बैठक का हिस्सा बने।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किया विशेष सम्मान
इस रिकॉर्ड की घोषणा के बाद केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों ने खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करतल ध्वनि से अभिवादन किया। कैबिनेट प्रस्ताव में कहा गया कि यह मील का पत्थर भारत की लोकतांत्रिक चेतना और जनता के अभूतपूर्व विश्वास का प्रतीक है।
बैठक के मुख्य एजेंडे
- विकसित भारत 2047: बैठक में ‘Viksit Bharat’ के रोडमैप और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई।
- नीतियों की समीक्षा: पिछले 12 वर्षों में गरीब कल्याण योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे वंदे भारत, अटल सेतु) और डिजिटल इंडिया के फायदों को समाज के आखिरी छोर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई।
- वैश्विक मुद्दे: सूत्रों के मुताबिक, बैठक में घरेलू रणनीतियों के साथ-साथ मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया के संकट पर भी चर्चा हुई।
