कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता गंवाने के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। पार्टी के भीतर सुलग रहा असंतोष अब एक खुली बगावत में बदल चुका है। तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और बारासात से चार बार की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार समेत करीब 20 सांसदों ने पाला बदलने का मन बना लिया है। इन सभी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा जताई है।
- “पार्टी में गालियां दी जा रही थीं”– काकोली घोष ने बयां किया दर्द
दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए चार बार की सांसद काकोली घोष ने पार्टी नेतृत्व (ममता बनर्जी) पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
जब उनसे पूछा गया कि क्या बगावत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने बेहद भावुक और कड़े लहजे में कहा, “उस तरफ से किसी ने बात करने की कोशिश नहीं की। जब मैं जिला अध्यक्ष थी और पार्टी के चुनाव परिणाम खराब रहे, तो मैंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद मुझे पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। मैं 40 साल से ममता बनर्जी के साथ हूँ। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा जब वह किसी को मुझे गालियां देने और मुझ पर भौंकने के लिए छोड़ देंगी।”
- चार बार की सांसद हैं काकोली, TMC का थीं बड़ा चेहरा
काकोली घोष दस्तीदार तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बेहद कद्दावर और संगठनात्मक चेहरा रही हैं। उन्होंने साल 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार बारासात सीट से जीत दर्ज की थी। संसद में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से बात रखने के लिए पहचानी जाने वाली काकोली घोष का जाना टीएमसी के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
- महुआ मोइत्रा ने साधा निशाना, बताया ‘लालची और गद्दार‘
सांसदों की इस सामूहिक बगावत पर तृणमूल कांग्रेस की फायरब्रांड नेता और सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बागियों को चुनौती देते हुए लिखा:
- बंगाल की राजनीति में क्यों मंचा है घमासान?
2026 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद से ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह मची हुई थी। पहले कई विधायकों ने बगावत के संकेत दिए और अब लोकसभा में सांसदों के इस बड़े गुट द्वारा स्पीकर को पत्र लिखने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये 20 सांसद आधिकारिक तौर पर एनडीए का हिस्सा बनते हैं, तो यह न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि केंद्र की राजनीति के समीकरणों को भी पूरी तरह बदल कर रख देगा।
