अमेरिकी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध से जुड़ी शक्तियों को सीमित करने वाला एक अहम प्रस्ताव पारित कर दिया है। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन और उनकी ईरान नीति के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
- वोटिंग में करीबी मुकाबला, 215 बनाम 208
इस प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि 208 सांसदों ने विरोध किया। वोटिंग में बेहद करीबी अंतर देखने को मिला, लेकिन प्रस्ताव के पारित होने के लिए यह पर्याप्त रहा।
सबसे खास बात यह रही कि रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए डेमोक्रेट्स का साथ दिया। इनमें Thomas Massie, Brian Fitzpatrick, Tom Barrett और Warren Davidson जैसे नाम शामिल हैं।
- “जनता युद्ध से परेशान है” – रिपब्लिकन सांसदों का तर्क
रिपब्लिकन सांसद टॉम बैरेट ने कहा कि उनके क्षेत्र के लोग लगातार युद्ध और उससे जुड़ी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई और जीवन-यापन की लागत बढ़ने के पीछे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष भी एक बड़ा कारण है।
- ट्रंप प्रशासन पर बढ़ता दबाव
इस प्रस्ताव को लेकर हाउस स्पीकर Mike Johnson ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम अमेरिकी राष्ट्रपति की कूटनीतिक और शांति वार्ता की कोशिशों को कमजोर कर सकते हैं। उनके अनुसार अमेरिका पहले ही अपने सैन्य लक्ष्यों को काफी हद तक पूरा कर चुका है और अब ध्यान शांति समझौते पर होना चाहिए।
हालांकि, इस विवाद के बीच ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक और कानूनी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
- 60 दिन के नियम का उल्लंघन?
कानून के अनुसार, किसी भी विदेशी सैन्य अभियान को 60 दिनों से अधिक जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होती है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह अभियान 28 फरवरी से चल रहा है और अब 60 दिन की सीमा को पार कर चुका है।
यही कारण है कि अब यह मामला कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है।
