कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक सरगर्मी के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की एक विशेष टीम ने गुरुवार (4 जून 2026) सुबह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक शौकत मोल्ला के दक्षिण 24 परगना स्थित आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए भांगड़ बम विस्फोट मामले के सिलसिले में की गई है।
एजेंसी इस मामले में मोल्ला के संभावित संबंधों और विस्फोट के पीछे छिपे नेटवर्क की सघन जांच कर रही है।
- क्या है भांगड़ बम विस्फोट मामला?
यह मामला विधानसभा चुनाव के ऐन पहले हुए एक भीषण बम विस्फोट से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई थी। स्थानीय स्तर पर जांच के बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग उठी थी। गृह मंत्रालय के निर्देश पर जांच का जिम्मा संभालने के बाद से ही NIA इस केस में काफी आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
- सुबह-सुबह पहुंची एनआईए की टीम
गुरुवार सुबह NIA की टीम भारी सुरक्षा बल के साथ भांगड़ के दक्षिण बामुनिया इलाके में स्थित शौकत मोल्ला के घर पहुंची। टीम ने पूरे परिसर को घेरकर तलाशी ली और पूर्व विधायक से लंबी पूछताछ की। छापेमारी के दौरान शौकत मोल्ला की पत्नी और बेटी भी घर के भीतर मौजूद थीं, हालांकि मीडिया के सवालों पर उनकी बेटी ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
- कब और कहां से मिले थे बम?
बता दें कि मामला 25 अप्रैल 2026 को उत्तर काशीपुर थाना, भांगर डिवीजन में FIR संख्या 62/2026 के तहत दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धाराएं लगाई गई थीं।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि दक्षिण 24 परगना जिले के मझेरहाट के पोइलपाड़ा इलाके में कब्रिस्तान के पास स्थित एक परित्यक्त मकान में देसी बम और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री छिपाकर रखी गई है।
सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में पुलिस ने जूट की रस्सियों से बंधी हुई 79 गोलाकार संदिग्ध देसी बमों के साथ अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया था।
फिलहाल NIA इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन विस्फोटकों के पीछे किस नेटवर्क का हाथ था और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
