उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां जैसे अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल भारत में लगातार बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिल रही है। इन निवेशों के चलते न केवल तकनीकी क्षेत्र में विकास हो रहा है, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। सर्जियो गोर ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक बन चुका है और अमेरिकी कंपनियां इस विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहती हैं।
अपने बयान में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो का हाल ही में चार दिनों का भारत दौरा इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के रिश्ते कितने महत्वपूर्ण और गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह उच्च स्तरीय दौरा भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ते विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। गोर ने यह भी कहा कि दोनों देश मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल सेक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।

इसके अलावा, उन्होंने ट्रंप प्रशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में शुरू की गई TRUST पहल का भी जिक्र किया, जिसका उद्देश्य रणनीतिक तकनीकों, भरोसेमंद सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को बढ़ावा देना है। इस पहल को दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आज अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से निर्यात की जाती हैं, जो भारत के फार्मा सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है।
परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर बात करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं और आने वाले समय में यह साझेदारी और भी गहरी होगी। इसके साथ ही दोनों देशों ने हाल ही में क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और उन्नत तकनीक के लिए आवश्यक खनिज संसाधनों की सुरक्षित और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यह कदम भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी राजदूत के इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अब अपने अंतिम दौर में है और आने वाले समय में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
