भारत-म्यांमार संबंधों में बड़ा मोड़, राष्ट्रपति दौरे से खुल सकते हैं कूटनीति के नए दरवाजे

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भारत और म्यांमार के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्वाइंग 30 मई से 3 जून तक भारत के दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने उनके दौरे की औपचारिक घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा होगा, इसलिए इसे कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

इस यात्रा के जरिए भारत म्यांमार के साथ अपने रिश्तों को सिर्फ सुरक्षा और सीमा तक सीमित न रखकर व्यापार, संस्कृति, कनेक्टिविटी और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों तक विस्तार देना चाहता है।

  • पीएम मोदी से होगी अहम मुलाकात

राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्वाइंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 1 जून को द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यागत रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।

बताया जा रहा है कि बातचीत में सीमा सुरक्षा, व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षेत्रीय सहयोग, एक्ट ईस्ट पॉलिसी और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे अहम मुद्दे शामिल रहेंगे।

  • बोधगया और मुंबई का भी दौरा

भारत यात्रा के दौरान म्यांमार के राष्ट्रपति बोधगया और मुंबई भी जाएंगे। बोधगया का दौरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बौद्ध धर्म दोनों देशों को गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों से जोड़ता है।

इसके अलावा राष्ट्रपति बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों और निवेश संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।

  • भारत ने पहले ही दिए थे संकेत

अप्रैल में राष्ट्रपति चुनाव के बाद जब यू मिन आंग ह्वाइंग ने शपथ ली थी, तब भारत ने विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह को यंगून भेजकर साफ संकेत दिया था कि नई दिल्ली म्यांमार के साथ नए सिरे से संबंध मजबूत करने की इच्छुक है।

कीर्ति वर्धन सिंह 8 से 11 अप्रैल तक म्यांमार के दौरे पर रहे थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग को लेकर बातचीत हुई थी।

  • सुरक्षा नजरिए से आगे बढ़ना चाहता है भारत

पिछले कुछ वर्षों में भारत म्यांमार को मुख्य रूप से सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के नजरिए से देखता रहा है। दोनों देशों के बीच करीब 1600 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है, जिसके चलते सीमा सुरक्षा, उग्रवाद और अवैध गतिविधियां हमेशा प्रमुख मुद्दे रहे हैं।

लेकिन अब भारत अपने पड़ोसी देश के साथ रिश्तों को व्यापक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। नई दिल्ली चाहती है कि म्यांमार के साथ सहयोग को व्यापार, ऊर्जा, संस्कृति, पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तक फैलाया जाए।

  • चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अहम दौरा

विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार के साथ भारत की बढ़ती सक्रियता का संबंध क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव से भी जुड़ा हुआ है। म्यांमार दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश माना जाता है।

भारत की ‘Act East Policy’, ‘Neighbourhood First’ और इंडो-पैसिफिक रणनीति में म्यांमार की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।

  • चुनावों के बाद बदल रहा समीकरण

2021 में सेना के तख्तापलट के बाद म्यांमार लगातार राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था। हालांकि हालिया चुनावों और नए राजनीतिक ढांचे के बाद अब भारत वहां की नई व्यवस्था के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्वाइंग का भारत दौरा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।


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