दुष्प्रचार के खिलाफ करणी सेना का बड़ा जवाब “Virendra Singh Tomar ही छत्तीसगढ़ करणी सेना के वैध प्रदेश अध्यक्ष हैं, थे और रहेंगे”, संगठन ने कहा – कुछ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा रखने वाले लोग फैला रहे भ्रम, प्रदेशभर में तेज़ी से चल रहा सदस्यता अभियान।
छत्तीसगढ़ में क्षत्रिय करणी सेना को लेकर पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक खबर तेजी से वायरल की जा रही है, जिसमें यह दावा किया गया कि लगभग 220 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन से इस्तीफा दे दिया है और इसका कारण Virendra Singh Tomar को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना बताया गया है।

हालांकि करणी सेना से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों और संगठन के जिम्मेदार लोगों ने इस खबर को पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और संगठन की छवि खराब करने का प्रयास बताया है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि यह खबर वास्तविकता से कोसों दूर है और कुछ असंतुष्ट लोगों द्वारा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
करणी सेना सूत्रों के अनुसार, जब Virendra Singh Tomar कुछ समय के लिए संगठनात्मक कार्यों और अन्य जिम्मेदारियों के कारण प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय नहीं थे, तब संगठनात्मक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए Abhishek Singh को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। यह एक अस्थायी व्यवस्था थी, ताकि प्रदेश में संगठन का कार्य सुचारु रूप से चलता रहे।
लेकिन जैसे ही Virendra Singh Tomar ने पुनः सक्रिय रूप से संगठन की कमान संभाली, संगठन के शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष Dr Raj Singh Shekhawat के निर्देशानुसार कार्यकारी व्यवस्था समाप्त कर दी गई। इसके बाद Abhishek Singh से कार्यकारी पद वापस ले लिया गया। इसकी जानकारी डा. राज शेखावत के सोशल मीडिया पेज पर मौजूद है।
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सूत्र बताते हैं कि इसी निर्णय से नाराज होकर Abhishek Singh ने अपने कुछ समर्थकों के साथ अलग गतिविधियां शुरू कर दीं और स्वयं को प्रदेश अध्यक्ष बताने का प्रयास करने लगे। संगठन का कहना है कि यह पूरी तरह अनुशासनहीन और संगठन विरोधी गतिविधि है, जिसका करणी सेना से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि अभिषेक सिंह को शुरुआत में रायपुर जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी वीरेंद्र सिंह तोमर की मौजूदगी में दी गई थी।
बाद में जब क्षत्रिय करणी सेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज सिंह शेखावत रायपुर पहुंचे थे, उस दौरान आंदोलन और आमंत्रण यात्रा के समय अभिषेक सिंह को “प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष” नियुक्त किया गया था, न कि “प्रदेश अध्यक्ष”।
संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ समय बाद राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की कार्यकारिणी भंग कर दी गई थी, जिसकी जानकारी स्वयं डॉ. राज सिंह शेखावत द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा की गई थी।
गौरतलब है कि जब विरेन्द्र सिंह तोमर अनुपस्थित थे, तब अभिषेक सिंह को डा. राज शेखावत ने कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया था, ताकि छत्तीसगढ़ में तोमर परिवार के खिलाफ हुई ज्यादतियों के खिलाफ लोगों को जोड़ा जा सके। लेकिन जैसे ही वीरेन्द्र सिंह तोमर ने कमान संभाल लिया, अभिषेक सिंह अपना इस्तीफा नहीं देने पर अड़ गए। लेकिन बाद में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। Karni Sena News के पास अभिषेक सिंह का इस्तीफा भी मौजूद है। जिसमें साफ तौर पर लिखा हुआ है कि अभिषेक सिंह कार्यकारी अध्यक्ष थे।

“Virendra Singh Tomar ही वैध प्रदेश अध्यक्ष”
करणी सेना के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि Virendra Singh Tomar ही छत्तीसगढ़ करणी सेना के आधिकारिक एवं वैध प्रदेश अध्यक्ष हैं। संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी इस पर अपनी सहमति और समर्थन व्यक्त किया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि Tomar के नेतृत्व में संगठन ने पिछले कुछ महीनों में प्रदेशभर में नई ऊर्जा के साथ काम शुरू किया है। जिला, ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं। युवा वर्ग तेजी से संगठन से जुड़ रहा है और समाजिक एकता को मजबूत करने के लिए नए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
करणी सेना के समर्थकों का कहना है कि Virendra Singh Tomar ने संगठन को केवल एक सामाजिक मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनसंपर्क, समाज सेवा और युवा नेतृत्व निर्माण का मजबूत माध्यम बनाने का प्रयास किया है।
Dr Raj Singh Shekhawat का स्पष्ट संदेश
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष Dr Raj Singh Shekhawat को संगठन का वैचारिक और रणनीतिक स्तंभ माना जाता है। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि Dr Shekhawat हमेशा अनुशासन, संगठनात्मक मर्यादा और सामाजिक एकता पर जोर देते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन के नाम का गलत उपयोग करने वाले या स्वयंभू पदाधिकारी बनने की कोशिश करने वाले लोगों को आधिकारिक मान्यता नहीं दी जाएगी।
Dr Raj Singh Shekhawat के करीबी पदाधिकारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में संगठन पूरी मजबूती के साथ Virendra Singh Tomar के नेतृत्व में कार्य कर रहा है और राष्ट्रीय नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।
“220 इस्तीफों” का दावा बताया गया भ्रामक
करणी सेना से जुड़े कई पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि 220 लोगों के इस्तीफे की बात पूरी तरह अतिरंजित और भ्रम फैलाने वाली है। संगठन का दावा है कि जिन लोगों के नाम दिखाए जा रहे हैं, उनमें से कई लोग सक्रिय सदस्य भी नहीं हैं, जबकि कुछ लोग लंबे समय से संगठन की गतिविधियों में शामिल ही नहीं थे।
संगठन के मीडिया प्रकोष्ठ का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत नाराजगी को “सामूहिक इस्तीफा” बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि सोशल मीडिया पर भ्रम का वातावरण बनाया जा सके।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में लोग संगठन छोड़ते, तो प्रदेश स्तर पर चल रहे कार्यक्रमों और बैठकों में इसका असर दिखाई देता, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।
प्रदेशभर में चल रहा विशाल सदस्यता अभियान
इन विवादों के बीच करणी सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे छत्तीसगढ़ में बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव, शहर-शहर और जिला स्तर पर युवाओं को संगठन से जोड़ने का कार्य तेजी से जारी है।
Virendra Singh Tomar स्वयं कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं। संगठन की ओर से सामाजिक जागरूकता, युवाओं के नेतृत्व विकास, धर्म रक्षा और समाजिक समरसता को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर बड़े सम्मेलन और युवा महाकुंभ जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं। संगठन का लक्ष्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि एक अनुशासित और मजबूत सामाजिक संगठन तैयार करना बताया जा रहा है।
युवाओं में बढ़ रहा समर्थन
करणी सेना के समर्थकों का कहना है कि Virendra Singh Tomar के नेतृत्व में संगठन को युवाओं का मजबूत समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में युवा उनके समर्थन में पोस्ट और वीडियो साझा कर रहे हैं।
कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि Tomar की कार्यशैली जमीन से जुड़ी हुई है। वे सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद करते हैं और संगठन के विस्तार को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि संगठन लगातार नए क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
समर्थकों से की गई विशेष अपील
करणी सेना के पदाधिकारियों और समर्थकों ने प्रदेशभर के समाजिक बंधुओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।
संगठन का कहना है कि कुछ लोग व्यक्तिगत स्वार्थ और पद की लालसा के कारण भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों द्वारा बनाए गए समानांतर या तथाकथित “फर्जी संगठन” का करणी सेना से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
समर्थकों से यह भी कहा गया है कि वे केवल संगठन के आधिकारिक पदाधिकारियों और अधिकृत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।
समाजिक एकता को कमजोर करने की साजिश?
कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि जैसे-जैसे करणी सेना का प्रभाव छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कुछ लोग संगठन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाना और गलत सूचनाएं प्रसारित करना उसी का हिस्सा बताया जा रहा है।
हालांकि संगठन के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से करणी सेना कमजोर नहीं होने वाली। बल्कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल और मजबूत हुआ है।
आगे की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में करणी सेना छत्तीसगढ़ संगठनात्मक विस्तार को और तेज करने जा रही है। जिला स्तर पर नई नियुक्तियां, युवा सम्मेलन, समाजिक कार्यक्रम और सदस्यता अभियान लगातार जारी रहेंगे।
Virendra Singh Tomar के नेतृत्व में संगठन अब प्रदेश के हर जिले में अपनी मजबूत टीम तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष Dr Raj Singh Shekhawat का मार्गदर्शन संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करणी सेना से जुड़े पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और Virendra Singh Tomar ही छत्तीसगढ़ करणी सेना के अधिकृत प्रदेश अध्यक्ष हैं। संगठन ने “220 इस्तीफों” वाली खबर को भ्रामक और वास्तविकता से दूर बताया है।
साथ ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अफवाह या स्वयंभू लोगों के झांसे में न आएं और संगठन की आधिकारिक विचारधारा तथा नेतृत्व के साथ जुड़े रहें।
“धर्मो रक्षति रक्षितः” के संदेश के साथ करणी सेना ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन अपने विस्तार और समाजिक कार्यों को पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाता रहेगा।
