सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सिलीगुड़ी में एक वकील की शिकायत के बाद उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह शिकायत वकील रिंकी चटर्जी द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसमें ममता बनर्जी पर हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है।
- 🚨 किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
- पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
धारा 351 (1): आपराधिक धमकी
धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किया गया अपमान
धारा 353: विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी, नफरत या द्वेष की भावना को बढ़ावा देना
- 📅 क्या है पूरा मामला?
- शिकायतकर्ता के अनुसार, यह विवाद साल 2025 में कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर के एक कार्यक्रम से जुड़ा है। आरोप है कि इस मंच से भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा था:
“मैं उस गंदे धर्म को नहीं मानती जिसे इस ‘जुमला पार्टी’ ने जानबूझकर गढ़ा है।”
शिकायत में कहा गया है कि एक मुस्लिम धार्मिक मंच से सनातन धर्म के स्वरूप को ‘गंदा’ कहना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इससे देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था को गहरी ठेस पहुंची है। इसके अलावा, उन पर साल 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी हिंदू समुदाय को परोक्ष रूप से धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
- 💬 टीएमसी (TMC) के भीतर से भी उठे विरोध के सुर
- इस कानूनी कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असहजता देखी जा रही है। पार्टी की दार्जिलिंग इकाई के महासचिव और वकील अत्री शर्मा ने इस पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए एक चौंकाने वाला बयान दिया है।
उन्होंने स्वीकार किया कि जब पार्टी सत्ता में थी, तब भी कई नेता इस बयान के खिलाफ थे। अत्री शर्मा ने कहा:
“सत्ता की कमान संभालते हुए ममता बनर्जी के लिए इस तरह की टिप्पणी करना वास्तव में अनुचित था।”
“हममें से जो लोग उस समय से पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं, उन्होंने भी इन टिप्पणियों का कभी समर्थन नहीं किया।”
“देश के हर नागरिक को शिकायत दर्ज कराने का नैतिक अधिकार है।”
- 🔍 आगे क्या?
- शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी ने उम्मीद जताई है कि कानून इस मामले में उचित और सख्त कार्रवाई करेगा। फिलहाल इस एफआईआर के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।
