पटना। भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इतनी गंभीर पुलिस कार्रवाई बिना सरकार के शीर्ष स्तर की जानकारी या अनुमति के संभव नहीं हो सकती।
मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की पुलिस मुठभेड़ में मौत होती है, तो यह केवल एक कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है, जबकि जनता जानना चाहती है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
“मुख्यमंत्री की भूमिका पर उठते हैं सवाल”
तेजस्वी यादव ने कहा कि राज्य में होने वाली किसी भी बड़ी पुलिस कार्रवाई की जानकारी सरकार के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचती है। ऐसे में यदि कथित एनकाउंटर को लेकर विवाद खड़ा हुआ है तो सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और बताना चाहिए कि कार्रवाई किस आधार पर की गई।
अधिकारी को नई जिम्मेदारी दिए जाने पर भी उठाए सवाल
राजद नेता ने कथित तौर पर मामले से जुड़े अधिकारी को नई जिम्मेदारी सौंपे जाने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब किसी कार्रवाई को लेकर विवाद हो और जांच की मांग उठ रही हो, तब संबंधित अधिकारी को नई जिम्मेदारी देना कई तरह के संदेह पैदा करता है। उनके अनुसार, इससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार को किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच करानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और न्याय प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रहना चाहिए।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
भरत तिवारी मामले को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बता रहा है। इस बीच पूरे मामले को लेकर जनता की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और जांच की दिशा पर टिकी हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले की जांच पारदर्शी तरीके से नहीं हुई तो यह आने वाले समय में बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल, सभी पक्ष जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं और यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विवाद पर आगे क्या कदम
