51 साल बाद फिर गरमाई आपातकाल की बहस, BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना

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नई दिल्ली: देश में आपातकाल लागू होने के 51 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का “सबसे काला अध्याय” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना नहीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सत्ता और कुर्सी को बचाना था।

मीडिया से बातचीत के दौरान रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आपातकाल का दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राजनीतिक विरोध को दबाने, विपक्षी नेताओं को जेल में डालने और नागरिक अधिकारों को सीमित करने का काम किया गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदले राजनीतिक हालात

भाजपा सांसद ने कहा कि 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद देश की राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदली थीं। उनके अनुसार, उसी के बाद सत्ता बचाने के उद्देश्य से आपातकाल लागू किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है, लेकिन उस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर सत्ता को प्राथमिकता दी गई।

प्रेस की स्वतंत्रता पर लगी थी रोक

रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर व्यापक सेंसरशिप लागू की गई थी। समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों पर नियंत्रण स्थापित किया गया तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत स्वतंत्र विचार और खुली अभिव्यक्ति होती है, लेकिन उस दौर में इन्हीं मूल्यों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा।

विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को किया गया था गिरफ्तार

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान हजारों विपक्षी नेताओं, छात्र नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में बंद कर दिया गया था। कई लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया। भाजपा नेता ने कहा कि उन लोगों का योगदान भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

नई पीढ़ी को इतिहास से सीखने की जरूरत

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आपातकाल केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के महत्व को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को उस दौर की घटनाओं के बारे में जानना चाहिए ताकि लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के महत्व को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

क्या था आपातकाल?

उल्लेखनीय है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। यह अवधि मार्च 1977 तक चली। इस दौरान कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और राजनीतिक गतिविधियों पर भी नियंत्रण रखा गया था। भारतीय राजनीति के इतिहास में यह दौर आज भी सबसे अधिक चर्चित और विवादित कालखंडों में गिना जाता है।

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