महाराष्ट्र की सियासत में बढ़ी तल्खी: सांसदों के दलबदल पर आमने-सामने आए संजय राउत और संजय जाधव

Date:

मुंबई/परभणी: महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल को लेकर जारी सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) से अलग होकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए सांसदों को लेकर अब बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इसी क्रम में परभणी से सांसद संजय जाधव ने शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

संजय जाधव ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी नेता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी ने अलग राजनीतिक रास्ता चुना है तो उसे दुश्मन की तरह क्यों देखा जा रहा है। लोकतंत्र में हर जनप्रतिनिधि को अपनी राजनीतिक सोच और जनता के हित में निर्णय लेने का अधिकार है।

  • ‘जनता और विकास को प्राथमिकता दी’

अपने राजनीतिक फैसले का बचाव करते हुए जाधव ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ जाना नहीं था, बल्कि अपने संसदीय क्षेत्र के विकास को गति देना था। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें विकास कार्यों और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए चुना है, इसलिए उन्होंने वही निर्णय लिया जो उन्हें अपने क्षेत्र के हित में उचित लगा।

  • राउत के बयान से बढ़ा विवाद

दरअसल, हाल ही में संजय राउत ने पार्टी छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हुए सांसदों पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की थी। राउत ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र की राजनीति में विचारधारा की जगह अब सत्ता और राजनीतिक सौदेबाजी ने ले ली है। उन्होंने कुछ हालिया राजनीतिक घटनाओं का हवाला देते हुए विपक्षी दलों और दलबदल करने वाले नेताओं पर सवाल उठाए थे।

राउत के इन बयानों के बाद शिंदे गुट के नेताओं ने भी पलटवार शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लगातार निशाना बनाकर राजनीतिक माहौल को अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण बनाया जा रहा है।

  • विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तापमान

राज्य में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी तैयारियों के बीच सांसदों के इस दलबदल ने महाराष्ट्र की राजनीति को और अधिक गर्म कर दिया है। एक ओर उद्धव ठाकरे गुट इसे राजनीतिक निष्ठा के खिलाफ कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर शिंदे गुट के नेता इसे विकास, स्थिरता और जनहित से जुड़ा निर्णय बता रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में दोनों गुटों के बीच बयानबाजी और अधिक तेज हो सकती है। दलबदल का यह मुद्दा न केवल शिवसेना की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य के व्यापक राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

राम मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस राजनीतिक एजेंडा चला रही है: भाजपा सांसद कंगना रनौत

नई दिल्ली: भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने...